एक गावं, जहां राशन पर मिलता है पानी
मुकेश मथराणी, बाड़मेर।
िविवधताओं से भरे इस देश में राशन पर चीनी, केरोिसन और अनाज के िवतरण की बात तो आपने और हमने सूनी है, लेिकन राशन पर पानी की बात आज भी अचरज भरी लगती है। लेिकन यह हकीकत है पिशचमी सीमावर्ती बाड़मेर िजले की, जहां जीवन का आधार माना जाने वाला पानी भी राशन पर िमलता है। सुनकर हैरत भले ही हो, लेकिन पिशचमी सीमावरती बाड़मेर िजले के कल्याणपुरा गांव में िपछले कुछ समय से ऐसा ही हो रहा है। लगभग बारह हजार की आबादी और 1300 पिरवारों वाले इस गांव में पानी का िवतरण राशन के आधार पर िकया जा रहा है। इतना ही नहीं िदलचस्प पहलु यह भी है िक गांव की पंचायत और लोगों ने अपने स्तर पर पानी की िवतरण व्यवस्था के िलए अगल से कार्िमकों की िनयुक्ती भी कर रखी है, जो पानी की सप्लाई के साथ बाकायदा उसका राशन में इन्द्राज भी करते है।
रेगिस्तानी धोरो के बीच रचेबसे पिश्चमी सीमावर्ती बाड़मेर के लोगों के िलए अकाल और सूखा कोई नई बात नहीं है। इतना ही संसद से सरहद तक का सफर तय करते करते भी अिधकाशं सरकारी योजनाएं बीच में ही दम तोड़ देती है, ऐसे में इस इलाके के लोगों के िलए ’’ अल्हा मेघ दे पानी दे िक दुआएं ’’ बचती है, जो कभी असर करती है तो कभी बेअसर होने पर पलायन इस इलाके के लोगों का नसीब है। बरसों बरस अकाल और सूखे का दशं झेलने वाले थार के सहरा के लोग पानी की कीमत जानते है। शायद यही कारण है िक यहां के लोगों ने पानी को बचाने का अपना ही लोक िवञान बना रखा है। इसी लोक िवञान की कहानी कहता है कल्याणपूर गांव।
बाड़मेर के कल्याणपूरा गांव िक बारह हजार िक आबादी को राशन कार्ड के आधार पर पानी की आपूर्ित की जाती है। इस व्यवस्था को अमलीजामा पहनाने के लिए गांव की पंचायत और गांव के लोगों ने अगल से कई कार्िमकों की िनियुक्ती कर रखी है। राशन पर पानी के िवतरण िक बकायदा राशन कार्ड में एंट्री तक होती है।
गांव के सरपंच दौलाराम ने बताया िक राम और राज के रूठ जाने के बाद गांव के लोगों ने अपने स्तर पर बरसों की इस समस्या से छुटकारा पाने की ठानी। उन्होनें बताया िक पहले पानी का टैंकर जोधपुर से लाना पड़ता था िजसकी कीमत 2000 हजार के आस पास थी, लेिकन गांव के लोगों ने आपस में िमलकर 10 लाख रूपये जमा िकए और उससे गांव में एक कुआं बनवाया। अब उस कुएं का पानी आज पूरे गाव में िवतिरत हो रहा है।
दौलाराम के मुताबिक गाव में राशन पर पानी के िवतरण की व्यवस्था होने के बाद हर पिरवार को आवश्यकता अनुसार पानी िमल रहा है। पानी की इस व्यवस्था को सूचारू रखने के लिए चार हजार लीटर पानी की एवज में 60 रूपए के िलए जाते है। सरपंच के मुतािबक इस गांव में पहले पानी के लिए लड़ाई होती रहती थी। ऐसे सबको बराबर पानी िमले, इस िलए हनमे राशन कार्ड प्रणाली लागू कर ली है। अब सबको बराबर का पानी िमल रहा है और हमें राहत भी िमली है। सरकारी तंत्र से खफा दौलाराम बताते है िक सरकार ने इस गांव को सिर्फ वादे िदए और कुछ नही।
मुकेश मथराणी, बाड़मेर।
िविवधताओं से भरे इस देश में राशन पर चीनी, केरोिसन और अनाज के िवतरण की बात तो आपने और हमने सूनी है, लेिकन राशन पर पानी की बात आज भी अचरज भरी लगती है। लेिकन यह हकीकत है पिशचमी सीमावर्ती बाड़मेर िजले की, जहां जीवन का आधार माना जाने वाला पानी भी राशन पर िमलता है। सुनकर हैरत भले ही हो, लेकिन पिशचमी सीमावरती बाड़मेर िजले के कल्याणपुरा गांव में िपछले कुछ समय से ऐसा ही हो रहा है। लगभग बारह हजार की आबादी और 1300 पिरवारों वाले इस गांव में पानी का िवतरण राशन के आधार पर िकया जा रहा है। इतना ही नहीं िदलचस्प पहलु यह भी है िक गांव की पंचायत और लोगों ने अपने स्तर पर पानी की िवतरण व्यवस्था के िलए अगल से कार्िमकों की िनयुक्ती भी कर रखी है, जो पानी की सप्लाई के साथ बाकायदा उसका राशन में इन्द्राज भी करते है।
रेगिस्तानी धोरो के बीच रचेबसे पिश्चमी सीमावर्ती बाड़मेर के लोगों के िलए अकाल और सूखा कोई नई बात नहीं है। इतना ही संसद से सरहद तक का सफर तय करते करते भी अिधकाशं सरकारी योजनाएं बीच में ही दम तोड़ देती है, ऐसे में इस इलाके के लोगों के िलए ’’ अल्हा मेघ दे पानी दे िक दुआएं ’’ बचती है, जो कभी असर करती है तो कभी बेअसर होने पर पलायन इस इलाके के लोगों का नसीब है। बरसों बरस अकाल और सूखे का दशं झेलने वाले थार के सहरा के लोग पानी की कीमत जानते है। शायद यही कारण है िक यहां के लोगों ने पानी को बचाने का अपना ही लोक िवञान बना रखा है। इसी लोक िवञान की कहानी कहता है कल्याणपूर गांव।
बाड़मेर के कल्याणपूरा गांव िक बारह हजार िक आबादी को राशन कार्ड के आधार पर पानी की आपूर्ित की जाती है। इस व्यवस्था को अमलीजामा पहनाने के लिए गांव की पंचायत और गांव के लोगों ने अगल से कई कार्िमकों की िनियुक्ती कर रखी है। राशन पर पानी के िवतरण िक बकायदा राशन कार्ड में एंट्री तक होती है।
गांव के सरपंच दौलाराम ने बताया िक राम और राज के रूठ जाने के बाद गांव के लोगों ने अपने स्तर पर बरसों की इस समस्या से छुटकारा पाने की ठानी। उन्होनें बताया िक पहले पानी का टैंकर जोधपुर से लाना पड़ता था िजसकी कीमत 2000 हजार के आस पास थी, लेिकन गांव के लोगों ने आपस में िमलकर 10 लाख रूपये जमा िकए और उससे गांव में एक कुआं बनवाया। अब उस कुएं का पानी आज पूरे गाव में िवतिरत हो रहा है।
दौलाराम के मुताबिक गाव में राशन पर पानी के िवतरण की व्यवस्था होने के बाद हर पिरवार को आवश्यकता अनुसार पानी िमल रहा है। पानी की इस व्यवस्था को सूचारू रखने के लिए चार हजार लीटर पानी की एवज में 60 रूपए के िलए जाते है। सरपंच के मुतािबक इस गांव में पहले पानी के लिए लड़ाई होती रहती थी। ऐसे सबको बराबर पानी िमले, इस िलए हनमे राशन कार्ड प्रणाली लागू कर ली है। अब सबको बराबर का पानी िमल रहा है और हमें राहत भी िमली है। सरकारी तंत्र से खफा दौलाराम बताते है िक सरकार ने इस गांव को सिर्फ वादे िदए और कुछ नही।
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