रोजाना एक करोड़ का नुकसान
दूरदिशर्ता का अभाव, सरकार को अब तक करीब 300 करोड़ का राजस्व नुकसान
मुकेश मथराणी बाड़मेर।
राजस्थान में देश के सबसे बड़े तेल क्षेत्र को ऑपरेट कर रही निजी कंपनी केयर्न इंडिया के लिए वेदांता रिसोर्सेज की 9.6 अरब डॉलर की बोली का जो भी अंजाम हो, लेकिन इस तेल क्षेत्र से जुड़े रॉयल्टी भुगतान के विवाद के चलते राजस्थान सरकार को रोजाना एक करोड़ रूपए के राजस्व का नुकसान हो रहा है।
बताया जा रहा है कि रॉयल्टी विवाद के चलते पिछले करीब दस माह से पूरी तैयारियों के बावजूद केयर्न इंडिया राजस्थान ब्लॉक से उत्पादन क्षमता को ब़ा नहीं पा रही है। वर्तमान में केयर्न राजस्थान ब्लॉक से प्रतिदिन सवा लाख बैरल कच्चे तेल का उत्पादन कर रही है। कंपनी के आला अधिकारियों के मुताबिक कंपनी अगस्त 2010 से उत्पादन क्षमता ब़ाने के तैयार है, जिसे प्रतिदिन सवा लाख बैरल से ब़ाकार ड़े लाख बैरल प्रतिदिन किया जा सकता है। कंपनी के मौजुदा उत्पादन क्षमता के आधार पर राजस्थान सरकार को प्रतिदिन 5 करोड़ रूपए का राजस्व मिल रहा है और उत्पादन ब़ने की स्थिति में राजस्व में प्रतिदिन एक करोड़ रूपए की वृद्धि का अनुमान है।
अब तक 300 करोड़ का राजस्व नुकसान
एक अनुमान के मुताबिक सरकार को इस विवाद के चलते अब तक करीब 300 करोड़ रूपए से अधिक के राजस्व का नुकसान हो चुका है। सरकार को होने वाला घाटा बदस्तुर जारी है। घाटे की शुरूआत करीब दस माह पूर्व हुई, जब इस क्षेत्र में केयर्न की साझेदार ओएनजीसी ने रॉयल्टी को साझा करने की मांग की।
क्या है कि रॉयल्टी विवाद
ओएनजीसी की राजस्थान ब्लॉक में 30 प्रतिशत की हिस्सेदारी है, पर उसे क्षेत्र के पूरे उत्पादन पर रॉयल्टी का भुगतान करना पड़ता है। पहले हुए करार के तहत उस पर केयर्न के हिस्से की रॉयल्टी भी चुकाने का जिम्मा है। सूत्रों का कहना है कि ओएनजीसी कॉन्ट्रैक्ट के मुताबिक बतौर रॉयल्टी चुकाई गई रकम इस तेल क्षेत्र से होने वाली आमदनी में से लौटाने की मांग कर रही है, लेकिन केयर्न रॉयल्टी के किसी तरह के भुगतान के मूड में नहीं है। केयर्न एनर्जी ने रॉयल्टी साझा करने का विरोध करते हुए कहा है कि तेल खोजने तक का रिस्क और खर्चा कंपनी की जिम्मेदारी थी और अब रॉयल्टी का पूरा भुगतान ओएनजीसी को ही करना होगा। जहां एक ओर ओएनजीसी ने सरकार से प्रोडक्शन शोयरिंग कान्ट्रेक्ट में बदलाव की मांग की है, तो दूसरी ओर केयर्न ने नियमों का हवाला देते हुए लिखा है कि पूर्व के समझौते को नहीं बदला जा सकता है।
उत्पादन पर असर
कंपनी के आला अधिकारियों के मुताबिक कंपनी अगस्त 2010 से उत्पादन क्षमता ब़ाने के तैयार है, जिसे प्रतिदिन सवा लाख बैरल से ब़ाकार ड़े लाख बैरल प्रतिदिन किया जा सकता है, लेकिन रॉयल्टी विवाद के चलते कंपनी आज भी सवा लाख बैरल प्रतिदिन के उत्पादन पर अटकी है।
अब तक 800 करोड़ का भुगतान
जानकारी के मुताबिक ओएनजीसी दिसंबर 2010 तक करीब 820 करोड़ रूपए के राजस्व का भुगतान कर चुकी है और इस परियोजना के लिए कंपनी को लगभग 12 हजार करोड़ रुपए की रॉयल्टी का भुगतान करना होगा।
सौदे पर असर
रॉयल्टी भुगतान को लेकर उठे विवाद के चलते केयर्नवेदाता सौदा पिछले 10 महीने से अटका हुआ है। रॉयल्टी भुगतान के ांचे में या पहले हुए करार में किसी तरह का बदलाव होने पर केयर्न एनर्जी की वैल्यूएशन में फर्क आएगा, जो कि सौदे के भविष्य पर सवाल पैदा कर सकता है? मामलें से जुड़े जानकारों का कहना है कि सौदे को इस शर्त पर सरकार की मंजूरी मिलने की उम्मीद जताई जा रही है कि केयर्न इस विवाद में ओएनजीसी की राय से सहमत हो जाए।
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