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Friday, June 17, 2011

सरहद की सुरक्षा से नहीं सरोकार 
पश्चिमी सीमा पर लगातार मिल रहा है पाकिस्तानी मोबाईल नेटवर्क
ट्राई के निर्णय पर अटका सरहद की सुरक्षा का मामला
मुकेश मथराणी, बाड़मेर। 
केन्द्र और राज्य सरकारों की कथित लापरवाही के चलते पश्चिमी सरहद पर राष्ट्रविरोधी गतिविधियों में लिप्त लोगों को परोक्ष रूप से शह मिल रही है। मामला पश्चिमी सरहद पर पकड़े गए पाकिस्तानी मोबाईल नेटवर्क से जुड़ा हैं। गौरतलब है कि पश्चिमी सीमावर्ती बाड़मेर जिले के सीमावर्ती गांवों में ग्रामीणों के मोबाईल हैण्डसेट पर पाकिस्तान मोबाइल कंपनीयों का नेटवर्क पकड़े जाने का मामला करीब दोतीन वर्ष पूर्व सामने आया था। मामला सामने आने पर आननफानन में इसकी जांच करवा कर सीमावर्ती गांवों में पाकिस्तानी मोबाईल नेटवर्क के सिग्नल पकड़े जाने की पुष्ठि तो कर ली गई, लेकिन उस नेटवर्क को जाम करने या उस मामलें में कार्रवाई के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए। नतीजा सीमावर्ती गांवों में ग्रामीणों क्षेत्रों में मोबाईल पर पाकिस्तानी कंपनीयों का मोबाईल नेटवर्क पकड़ा जाना अब आम बात हो गई हैं।
जानकारी के मुताबिक सीमावर्ती बाड़मेर जिले में बाड़मेर शहर से करीब बीस किमी दूर पश्चिम दिशा में पिछले लम्बे समय ग्रामीणों के मोबाइल हैण्डसैट पर पाक मोबाइल कंपनीयों सिग्नल मिल रहे हैं। चौकाने वाला पहलू तो यह हैं कि यह इलाका सीमा से सौ किमी दूर होने के बावजुद यहां पांच मोबाइल कंपनियों के सिग्नल पकड़ में आ रहे हैं। बाड़मेर शहर से करीब 20 किमी दूर पश्चिम दिशा में स्थित गुड़ीसर एवं आसपास के गांवों में यह नेटवर्क पकड़े जाने की पुश्ठि की गई है। हवाई दूरी के लिहाज से इन क्षेत्रों की बाड़मेर शहर से दूरी महज 1012 किमी ही होगी। इन क्षेत्रों में पाक मोबाईल सिग्नल्स के मामले ने सुरक्षा एजेंसियों के कान खड़े कर दिए हैं। थार एक्सप्रेस में प्रतिबंधित पाक मोबाइल सेवा की सिम बरामद होने के मामलों को देखते हुए इस तरह के सिग्नलों ने पश्चिमी सीमा पर सुरक्षा के लिए नया खतरा पैदा कर दिया हैं।
सरकारी स्तर पर हो चुकी है पुश्ठि 
उल्लेखनीय हैं कि पिछले वर्ष फरवरी और मार्च महीने में दूरसंचार विभाग की विजिलेंस एवं टेलीकॉम मॉनिटरिंग सेल ने सीमावर्ती क्षेत्रों का पाक मोबाइल सिग्नलों का विस्तृत सर्वे किया था। उस सर्वे के दौरान सीमा से लगते 44 स्थानों पर किए गए सर्वे में 39 स्थानों पर पाक मोबाइल नेटवर्क की पुष्टि हुई है। इसके अलावा यह भी सामने आया हैं कि पाक ने अपने क्षेत्र में 9 स्थानों पर सीमा के नजदीक मोबाइल टॉवर स्थापित किए हैं। सीमा सुरक्षा बल ने भी दूरसंचार विभाग को चेताया हैं कि इस तरह मोबाइल नेटवर्क की घुसपैठ सुरक्षा के लिए घातक साबित हो सकती हैं।
क्या हैं नियम... 
नियमानुसार अंतरराष्ट्रीय सरहद से दो तरफ 500 मीटर के इलाके में किसी मोबाइल कंपनी का नेटवर्क नहीं होना चाहिए। यह नो सर्विस जोन के दायरे में आता है।
सुरक्षा एंजेसिया दे चुकी है चेतावनी
बाड़मेर जिला मुख्यालय पर होने वाली आंतरिक सुरक्षा बैठक में भी सभी खुफिया एजेसियों ने सरहदी क्षेत्रों में पाक मोबाइल नेटवर्क पर चिंता जाहिर करते हुए तत्काल कदम उठाने को कहा था। इतना ही नहीं चंडीग़ में संपन्न हुई बीएसएफपाक रेंजर्स की द्विवार्षिक मीटिंग और मुनाबाव में दोनों दों के बीच होने वाली त्रैमासिक मीटिंग में भी कई बार इस मामले को लेकर भारतीय अधिकारी अपना विरोध प्रकट कर चुके हैं। लेकिन उक्त बैठकों में शामिल हुए पाकिस्तानी अफसरों ने यह कहकर पल्ला झाड़ लिया था कि यह मामला उनके देश के दूरसंचार महकमे के अधीन आता हैं। इस मामले में सीमा सुरक्षा बले के अधिकारियों का कहना है कि चूंकि इस मामले में विभागीय विजिलेंस टीम स्वयं ऐसे सिग्नल पकड़ चुकी हैं, लिहाजा अब आवश्यक कदम उठाने की जिम्मेदारी विभाग की ही हैं।
किस कंपनी का नेटवर्क...
पाक मोबाइल सेवा प्रदात्ता कंपनी पीके यू फोन, टेलनोर पीके, मोबीलिंक, वर्ल्ड टेल, पाक पीएल के सिग्नल पकड़ में आ रहे हैं। स्थानीय लोगों के मुताबिक सुबह एवं शाम के समय पाकिस्तानी मोबाइल कंपनियों के सिग्नलों की क्षमता ब़ जाती हैं।
मुश्किल नहीं सिम लाना
थार एक्सप्रेस से नकली नोट एवं अन्य प्रकार सामान के साथसाथ पाक से मोबाइल सिम की तस्करी के मामले भी सामने आ चुके हंैं। कुछ समय पूर्व अवैध रूप से मुनाबाव में घुसपैठ करने वाले दो लड़के भी मोबाइल के साथ पाकिस्तानी सिम के साथ पकड़े गए थे।
पाकिस्तानी सिम के उपयोग पर प्रतिबंध 
हालाकि इस मामले में जिला प्रशासन ने सख्ती जरूर दिखाई हैं लेकिन प्रभावी रोकथाम के अभाव में इन पाक सिग्नल का आना बदस्तूर जारी हैं। इस मामले में बाड़मेर के जिला मजिस्ट्रेट एवं जिला कलेक्टर गौरव गोयल ने सीमावर्ती क्षेत्रों में पाकिस्तानी लोकल सिम के उपयोग पर प्रतिबंध लगा दिया हैं और पाकिस्तानी लोकल सिम का उपयोग करते हुए पकड़े जाने पर कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी है। जिला मजिस्ट्रेट गौरव गोयल ने बताया कि बाड़मेर जिले से लगने वाली अन्तरराष्ट्रीय सीमा पर पाकिस्तानी इलाके में लगे मोबाइल टॉवर्स का नेटवर्क भारतीय सीमा के करीब तीन चार किलोमीटर अंदर तक आ रहा है। ऐसे में पाकिस्तानी लोकल सिम से पाकिस्तानी नेटवर्क के जरिए आसानी से सम्पर्क होने की आशंका को देखते हुए धारा 144 दण्ड प्रक्रिया संहिता 1973 के अन्तर्गत पाकिस्तानी लोकल सिम के उपयोग पर प्रतिबंध लगाया गया है।
गेंद अब केंद्र के पाले में... 
सीमावर्ती क्षेत्र में पाक मोबाइल नेटवर्क की घुसपैठ की बात दूरसंचार विभाग ने मान ली हैं। लेकिन मामला उच्च स्तरीय होने के कारण टेलीफोन रेग्यूलेटरी ऑथारिटी स्तर पर कोई ठोस निणर्य ना होने पाने की स्थिति में ठोस कार्यवाही संभव नहीं हो पा रही हैं। ऐसे में अब केंद्र को ही फैसला करना है कि इस पर अंकुश लगाने के लिए भारतीय क्षेत्र में क्या कदम उठाए जाएं और पाक को अंतरराष्ट्रीय नियमों के उल्लंघन से कैसे रोका जाए?
जैमर या बीटीएस से रूक सकता हैं घुसपैठ... 
भारतीय सीमा में पाक नेटवर्क की घुसपैठ को रोकने के लिए उच्च क्षमता और तकनीक के जैमर या बीटीएस ही एक मात्र जरिया रह गया हैं। लेकिन उच्च स्तरीय स्वीकृति नहीं मिल पाने के कारण यह मामला अभी तक ठण्डे बस्ते में पड़ा हुआ हैं। सूत्रों के मुताबिक कुछ समय पूर्व सीमावर्ती क्षेत्रों में कराए गए सर्वे के बाद पाक नेटवर्क को रोकने के लिए प्रस्ताव बनाकर केन्द्र सरकार एवं ट्राई के पास भिजवा दिया था। लेकिन वहां पर इस मामले को लेकर कोई सकि्रयता और गंभीरता नहीं दिखाने के कारण यह मामला ठण्डे बस्ते में चला गया।
इस मामले में बाड़मेर कार्यवाहक जिला दूरसंचार अधिकारी योगेश कुमार भास्कर ने बताया कि भारतीय सीमा में पाक नेटवर्क एक गंभीर मामला हैं। उनके मुताबिक ना केवल बाड़मेर वरन बाड़मेर के साथ ही साथ जैसलमेर, गंगानगर एवं बीकानेर के सीमावर्ती क्षेत्रों के साथ पूरी पिचमी सीमा पर पाक मोबाईल नेटवर्क काफी समय से मिल रहा हैं। इस पर अंकुश लगाने के लिए उच्च क्षमता के जैमर या बीटीएस लगाकर इस पर प्रभावी रोक लगाई जा सकती हैं। भास्कर के मुताबिक बीएसएनएल महज के मोबाइल सेवा प्रदाता हैं, इस मामलें में कोई भी कार्यवाही या फैसला टेलीफोन रेग्यूलेटरी अॅथारिटी के स्तर पर ही किया जा सकता है।

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